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Sunday, October 12, 2008

ASHTA LAXMI STOTRAM





 ॥ आदिलक्ष्मी॥

 सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि चन्द्र सहोदरि हेममये ।
मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि मञ्जुळभाषिणि वेदनुते॥
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद्गुणवर्षिणि शान्तियुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मी सदा पालय माम्॥१॥

॥ धान्यलक्ष्मी॥

 अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये ।
क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते॥
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥२॥

॥ धैर्यलक्ष्मी॥

जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये ।
सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते॥
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥३॥

॥ गजलक्ष्मी॥

जयजय दुर्गतिनाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये ।
रथगज तुरगपदादि समावृत परिजनमण्डित लोकनुते॥
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥४॥

॥ सन्तानलक्ष्मी॥

अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये ।
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि स्वरसप्त भूषित गाननुते॥
सकल सुरासुर देवमुनीश्वर मानववन्दित पादयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम्॥५॥

॥ विजयलक्ष्मी॥

 जय कमलासनि सद्गतिदायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये ।
अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर- भूषित वासित वाद्यनुते॥
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित शङ्कर देशिक मान्य पदे ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि विजयलक्ष्मि सदा पालय माम्॥६॥

॥ विद्यालक्ष्मी॥

 प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये ।
मणिमयभूषित कर्णविभूषण शान्तिसमावृत हास्यमुखे॥
नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम्॥७॥

॥ धनलक्ष्मी॥

धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि धिंधिमि दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये ।
 घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते॥
वेदपुराणेतिहास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते ।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि धनलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥८॥